शाश्वत ज्ञान

चार वेद

वेदाः — अपौरुषेय ज्ञान

अपौरुषेय — मानव रचित नहीं। वेद ईश्वर की शाश्वत वाणी हैं, जो ऋषियों को प्रकट हुए और सहस्राब्दियों से ध्वनि द्वारा संरक्षित हैं।

चतुर्वेद

जीवंत शास्त्र

‘वेद’ शब्द ‘विद्’ धातु से बना है — जिसका अर्थ है ‘जानना’। चार वेद सनातन धर्म की नींव हैं, प्रत्येक की अपनी संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक एवं उपनिषद है। शिव के भक्त के लिए ये सर्वोपरि रूप से रुद्र की महिमा से गूँजते हैं।

ऋग्वेद

स्तुति का वेद

ऋग्वेद

वेदों में सबसे प्राचीन, देवताओं की स्तुति में एक हज़ार से अधिक सूक्तों का संग्रह। इसमें रुद्र सूक्त सम्मिलित हैं जो शिव के प्रचंड एवं करुणामय रूप का गुणगान करते हैं।

इसमें गायत्री मंत्र एवं सृष्टि पर नासदीय सूक्त हैं।

यजुर्वेद

यज्ञ का वेद

यजुर्वेद

यज्ञ की विधियों का वेद, जो यज्ञों के अनुष्ठान का मार्गदर्शन करता है। इसमें पूजनीय श्री रुद्रम (नमकम्–चमकम्) है, जो भगवान रुद्र-शिव को समर्पित परम सूक्त है।

श्री रुद्रम का स्रोत — ‘ॐ नमः शिवाय’ यहीं आता है।

सामवेद

संगीत का वेद

सामवेद

गान एवं संगीत का वेद, जो ऋग्वेद के मंत्रों को पावन स्वर में बाँधता है। इसे भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं भक्ति-नाद के मूल के रूप में माना जाता है।

नाद का उद्गम — दिव्य ध्वनि द्वारा आराधना।

अथर्ववेद

जीवन का वेद

अथर्ववेद

दैनिक जीवन का वेद — आरोग्य, रक्षा, समृद्धि एवं आंतरिक ज्ञान। यह पावन को मानव जीवन की सामान्य लय में पिरो देता है।

व्यावहारिक ज्ञान एवं गहन दर्शन का संगम।

यजुर्वेद से

श्री रुद्रम

भगवान शिव को समर्पित सर्वाधिक पावन वैदिक सूक्त, जो हमारे मंदिर में रुद्राभिषेक के समय जपा जाता है। इसमें हर भक्त को ज्ञात वह महान मंत्र प्रकाशित होता है —

ॐ नमः शिवाय